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जानिए अमरनाथ का पूरा इतिहास

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जानिए अमरनाथ का पूरा इतिहास पैगंबर मोहम्मद साहब का जब जन्म भी नहीं हुआ था, तब से अमरनाथ गुफा में हो रही है पूजा-अर्चना! इसलिए इस झूठ को नकारिए कि अमरनाथ गुफा की खोज एक मुसलिम ने की थी ! जानिए अमरनाथ का पूरा इतिहास ताकि अपने बच्चों को बता सकें .  बाबा बर्फानी के दर्शन के अमरनाथ यात्रा शुरू हो गयी है। अमरनाथ यात्रा शुरू होते ही फिर से सेक्युलरिज्म के झंडबदारों ने गलत इतिहास की व्याख्या शुरू कर दी है कि इस गुफा को 1850 में एक मुसलिम बूटा मलिक ने खोजा था! पिछले साल तो पत्रकारिता का गोयनका अवार्ड घोषित करने वाले इंडियन एक्सप्रेस ने एक लेख लिखकर इस झूठ को जोर-शोर से प्रचारित किया था। जबकि इतिहास में दर्ज है कि जब इसलाम इस धरती पर मौजूद भी नहीं था, यानी इसलाम पैगंबर मोहम्मद पर कुरान उतरना तो छोडि़ए, उनका जन्म भी नहीं हुआ था, तब से अमरनाथ की गुफा में सनातन संस्कृति के अनुयायी बाबा बर्फानी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कश्मीर के इतिहास पर कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ और नीलमत पुराण से सबसे अधिक प्रकाश पड़ता है। श्रीनगर से 141 किलोमीटर दूर 3888 मीटर की उंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा को तो भारतीय पुरातत्व ...

चारधाम / बद्रीनाथ के कपाट 15 मई को खुलेंगे,

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चारधाम / बद्रीनाथ के कपाट 15 मई को खुलेंगे , मुख्य पुजारी समेत 27 लोग मौजूद रहेंगे श्रद्धालुओं को इजाजत नहीं देहरादून. बद्रीनाथ धाम के कपाट 15 मई को सुबह 4.30 बजे खुलेंगे। इस दौरान मुख्य पुजारी (रावल) समेत सिर्फ 27 लोग मौजूद रहेंगे। इनमें पुजारी और देवस्थान बोर्ड के अधिकारी शामिल होंगे। श्रद्दालुओं को मौजूद रहने की इजाजत नहीं होगी। जोशीमठ के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट अनिल चन्याल ने यह जानकारी दी है। मुख्य पुजारी ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी का कोरोना टेस्ट दो बार निगेटिव आ चुका है। वे दो हफ्ते का क्वारैंटाइन पूरा कर चुके हैं। केरल से लौटने की वजह से उन्हें क्वारैंटाइन किया गया था। केरल का पुजारी करता है पूजा बद्रीनाथ धाम में भगवान के पांच स्वरूपों की पूजा की जाती है। विष्णुजी के इन पंच स्वरूपों को पंच बद्री कहा जाता है। बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा अन्य चार स्वरूपों के मंदिर भी यहीं हैं। श्री विशाल बद्री पंच स्वरूपों में मुख्य हैं। आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा तय की गई व्यवस्था के मुताबिक बद्रीनाथ मंदिर का मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के केरल राज्य से होता है। मंदिर हर साल अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर...

पंचमुखी हनुमान में है भगवान शंकर के पांच अवतारों की शक्ति

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पंचमुखी हनुमान में है भगवान शंकर के पांच अवतारों की शक्ति पंचमुखी हनुमान में है भगवान शंकर के पांच अवतारों की शक्ति शंकरजी के पांचमुख—तत्पुरुष, सद्योजात, वामदेव, अघोर व ईशान हैं; उन्हीं शंकरजी के अंशावतार हनुमानजी भी पंचमुखी हैं । मार्गशीर्ष (अगहन) मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को, पुष्य नक्षत्र में, सिंहलग्न तथा मंगल के दिन पंचमुखी हनुमानजी ने अवतार धारण किया । हनुमानजी का यह स्वरूप सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाला है । हनुमानजी का एकमुखी, पंचमुखी और ग्यारहमुखी स्वरूप ही अधिक प्रचलित हैं । हनुमानजी के पांचों मुखों के बारे में श्रीविद्यार्णव-तन्त्र में इस प्रकार कहा गया है— पंचवक्त्रं महाभीमं त्रिपंचनयनैर्युतम् । बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकाम्यार्थ सिद्धिदम् ।। विराट्स्वरूप वाले हनुमानजी के पांचमुख, पन्द्रह नेत्र हैं और दस भुजाएं हैं जिनमें दस आयुध हैं—‘खड्ग, त्रिशूल, खटवांग, पाश, अंकुश, पर्वत, स्तम्भ, मुष्टि, गदा और वृक्ष की डाली । ▪ पंचमुखी हनुमानजी का पूर्व की ओर का मुख वानर का है जिसकी प्रभा करोड़ों सूर्य के समान है । वह विकराल दाढ़ों वाला है और उसकी भृकुटि...

संकटमोचन हनुमान अष्टक

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संकटमोचन हनुमान अष्टक :- बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों ताहि सो त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात  न टारो देवन आनि करी विनती तब, छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो, को – १ बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो चौंकि महामुनि शाप दियो तब , चाहिए कौन बिचार बिचारो कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो, – को – २ अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीश यह बैन उचारो जीवत ना बचिहौ हम सो  जु , बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो हेरी थके तट सिन्धु सबै तब , लाए सिया-सुधि प्राण उबारो,-  को – ३ रावण त्रास दई सिय को तब , राक्षसि सो कही सोक निवारो ताहि समय हनुमान महाप्रभु , जाए महा रजनीचर मारो चाहत सीय असोक सों आगिसु , दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो, -को – ४ बान लग्यो उर लछिमन के तब , प्राण तजे सुत रावन मारो लै गृह बैद्य सुषेन समेत , तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो आनि संजीवन हाथ दई तब , लछिमन के तुम प्रान उबारो, – को – ५ रावन युद्ध अजान कियो तब , नाग कि फांस सबै सिर डारो श...